Things that are helping us relax

Take Care of Yourself

Please do not step out and wear a mask to help curb the spread of Covid19.

These times can be tough to handle and often we end up feeling helpless and not in control of the situation. Please know that by staying in you are doing a great deal to stop the spread of the virus. Here is what has been helping Team OCEEDEE relax:

Deep breaths help
Why don’t you take a deep breath with us? It helped, didn’t it?
Deep breaths can help you calm your mind when things can get a bit too much to handle. They also help your body take in more oxygen and keep you healthy.

Do an activity
Doing a calming activity like reading a book, painting, or yoga can help you relax your mind and feel more in control of the situation.

Essential Oil
You can add an essential oil to your diffuser or light up some candles while meditating to calm your mind.

Staying in touch
Stay in touch with your loved ones, we've been hosting a weekly video call to cheer up each other.

We also wanted to share a poem with you all by Shankar Shailendra that helps us on our gloomy days

तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन
ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गये हज़ार दिन
कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........
सुबह और शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर
तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूम कर
तू आ मेरा सिंगार कर तू आ मुझे हसीन कर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........
हज़ार भेष धर के आई मौत तेरे द्वार पर
मगर तुझे न छल सकी, चली गई वो हारकर
नई सुबह के संग सदा तुझे मिली नई उमर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........
हमारे कारवां को मंज़िलों का इंतज़ार है
ये आँधियों, ये बिजलियों की पीठ पर सवार है
तू आ कदम मिला के चल, चलेंगे एक साथ हम
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........
ज़मीं के पेट में पली अगन, पले हैं ज़लज़ले
टिके न टिक सकेंगे भूख रोग के स्वराज ये
मुसीबतों के सर कुचल, चलेंगे एक साथ हम
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........
बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये
न दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इंकलाब ये
गिरेंगे ज़ुल्म के महल, बनेंगे फिर नवीन घर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
तू ज़िंदा है तो..........

 

 

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